Ayurvedic इन 10 आयुर्वेदिक तरीकों से सुधारें पाचन क्रिया, निकल जाएगी शरीर की सारी बीमारियां

पाचन क्रिया हमारे शरीर के महत्तपूर्ण हिस्सों में से एक है। यह हमारे शरीर में गए खाने को पचाता है और हमे ऊर्जा प्रदान करता है। एक स्वस्थ पाचन क्रिया शरीर में गए खाने को पचाके हमे उस में से अधिकतम पोषक तत्वों को शरीर के हर हिस्से तक पहुंचाता है। परन्तु हम सबको किसी न किसी मौके पर बुरी पाचन क्रिया का अनुभव हुआ है। पाचन तंत्र के अंदर मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के असंतुलन से हमे ऐसा अनुभव होता है। यह संतुलन निद्रा, दवाइयाँ, ज्यादा मात्रा में मीठा लेना और शराब के सेवन से बिगड़ जाता है।

आयुर्वेद Ayurvedic में पाचन तंत्र को अग्नि के समान माना जाता है। पाचन तंत्र को शरीर का ऊर्जा स्त्रोत्र माना जाता है। शरीर में उत्पादित हर शक्ति का ईजाद इसी पाचन तंत्र से ही होता है। दिल्‍ली के स्‍वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्‍सालय के डॉ. प्रमोद बाजपाई बता रहे हैं पाचन तंत्र को सही और स्वस्थ रखने के 10 टिप्स।

1. स्वस्थ और एकाग्र होके खाना :

आजकल की जीवन शैली में हर इंसान एक साथ काफी काम करने का सोचता है और यही से समस्याए शुरू होती है। आयुर्वेद हमेशा एकाग्र होके खाने का सुझाव देता है क्यूंकि ऐसा करने से हमारे मस्तिष्क को हमारे खाने के बारे में सही जानकारी मिलती है। हल्का, सादा खाना, सुपाच्य खाना एवं सात्त्विक खाना आपकी अग्नि को ऊर्जावान रहने में सबसे ज्यादा सहायक है।

2. अग्नि को भुजाने वाले पदार्थो से परहेज़ :

बुरे तरल पदार्थ आपकी अग्नि को भुझा सकते है । अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे की कोल्ड ड्रिंक्सआदि का सेवन आपके पाचन तंत्र को असंतुलित कर सकते है। ज्यादा सोना, ज्यादा खाना भी आपकी अग्नि का अस्तित्व मुसीबत में डालते है।

3. अपनी अग्नि को सुधारना :

हम अपनी अग्नि को पहले  से सुधर सकते है जिससे की वो  अधिक अच्छे परिणाम दे। खाने से पहले हल्का साटहलना अपनी अग्नि को सुधरने का एक सरल और फायदेमंद सुझाव है। सुबह उठते ही 2 गिलास पानी पीना भी अपने पाचन तंत्र को चरम सीमापर रखेगा।

4. अधिक गुणों वाले खाद्य पदार्थो का सेवन करना :

दिनचर्या में गुणवान खाद्य पदार्थो का आहार सेवन करना आपके पाचन तंत्र वाली अग्नि कोसुधार सकते है। आपके आहार में पर्याप्त मात्रा में सब्ज़िया एवं फल होना आपके पाचन तंत्र के लिए आवश्यक है। इस तरह का आहार आपकोपाचन में होने वाली बिमारिओ से बचा सकता है।

5. रोज एक ही समय पर खाना :

यह आदत अपनाने में थोड़ी मुश्किल है पर इस आदत के फायदे भरपूर है। रोज एक ही समय पर खाना आपके पाचन तंत्र को चरम सीमा पर रखकर उसकी उत्पादकता बढ़ाता है।

6. वर्जिश महत्वपूर्ण है :

काफी समय तक एक ही जगह पर बैठके काम करना व् पढ़ना आपके शरीर की पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। आयुर्वेद हमेशा सही प्रकार की वर्जिश करने की सलाह देता है जिससे की आपका पाचन तंत्र एवं शरीर दोनों ही उच्चतम बने रहे।

7. ताज़ी हवा और कुछ आसन :

जैसे की अग्नि को जलने के लिए हवा की जरुरत होती है, उसी प्रकार आपके पाचन तंत्र की अग्नि को भी बरकरार रखने के लिए ताज़ी हवा की जरूरत होती है। सुबह घूमने जाना या फिर प्रकृति में लंबी पैदल यात्रा करने आपको ताज़ी हव का सेवनअनुभव करा सकते है।

8.  ध्यान लगाना :

अपनी फ़िक्रों और तनावों को दूर रखने का ध्यान लगाने से बेहतर उपाय शायद ही कोई होगा। हर रोज केवल 5 मिनट एकाग्रता से ध्यान लगाना आपको असंख्य लाभ दे सकता है।

9. सही मात्रा में पानी का सेवन :

रोज सही मात्रा में पानी पीना आपके पाचन तंत्र के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक होता है। पानी न केवल पाचनतंत्र के अंदर मौजूद बैक्टीरिया में संतुलन बनाये रखता है बल्कि पूरे शरीर में खाने से मिले पोषक तत्वों को पहुँचाने में सहायक रहता है।

10. विषहरण क्रिया:

आयुर्वेद पाचन तंत्र को विषहरण क्रिया से साफ़ रखने की सलाह भी देता है। विषहरण क्रिया हर एक इंसान के लिए अलगहो सकती है। विषहरण क्रिया से आप अपनी अग्नि को एक शक्तिशाली तरीके से फिरसे शुरू कर सकते है। विषहरण क्रिया से आप अपने अंदरूनी प्रणाली की मरम्मत कर उसे उसकी उच्चतम उत्पादकता पर पहुंचा  सकते है। विषहरण क्रिया फलो के जूस के सेवन से लेकर पंचकर्माथेरेपी तक विस्तारित है।

पाचन तंत्र के अंदर की अग्नि हर मनुष्य को सकिर्या और ऊर्जा से भरपूर रखती है। पाचन तंत्र में संतुलन बनाये रखना एक स्वस्थ एवं लम्बी जिंदगी को बढ़ावा देता है। इसीलिए, सभी को अपनी पाचन तंत्र की अखंडता को बरकरार रखना जरुरी है।

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